ये आलम ये मौसम, है साया तुम्हारा,
ज़र्द धूप का रूप, है साया तुम्हारा।
बहती हवा जैसे ज़ुल्फ़ों से आएँ,
रोशनी दो जहाँ में, चेहरे से छाएँ।
फूलों से नाज़ुक ये लब तुम्हारे,
हम हैं सनम बस अब तुम्हारे।
ख़ुदा का नया कोई जादू हो तुम....
बहुत खूबसूरत हो तुम.....
माथे पे बिंदिया सजाई हुई है,
मौसम को भी लाज आई हुई है।
खिलते कमल जैसे गाल गुलाबी,
हुस्न की हर अदा है बिल्कुल रुबाबी,
मेरी खुशियों की चाबी हो तुम,
बहुत खूबसूरत हो तुम.....
देखता हूँ तुम्हें तो मैं ये सोचता हूँ,
तुमको बोलूँ या देखूँ मैं ये सोचता हूँ।
तराशा जब होगा तुमको ख़ुदा ने,
उड़ी होंगी उमरों तक तारों की नींदें,
गुनगुनाया जिसको बिन कहे मेरे दिल ने,
वो पाकीज़ा ख़्वाब, वो साज़ हो तुम,
बहुत खूबसूरत हो तुम....
- प्रशांत वर्मा