हर साल ये जन्मदिन आता रहा,
उम्र का एक पन्ना बढ़ाता रहा।
सपनों को सीने में सजाता रहा,
गिरकर भी खुद को उठाता रहा।
कल शायद किस्मत का पन्ना बदल जाए,
मेहनत का सिलसिला आखिर रंग लाए।
जिस दिन हाथ में नियुक्ति-पत्र आए,
उस दिन मेरा जन्मदिन सच में कहलाए।
माँ की आँखों में खुशियाँ झलकेंगी,
पापा की आँखें गर्व से चमकेंगी।
जिस सपने को बरसों से दिल में पाला है,
उस दिन लगेगा—मेहनत ने रंग डाला है।
आज संघर्ष है, कल पहचान होगी,
मेरी मेहनत ही मेरी शान होगी।
जिस दिन नौकरी की खबर घर आएगी,
उस दिन मेरी हर कोशिश मुस्कुराएगी।
बस एक नियुक्ति-पत्र का इंतज़ार है,
उसमें मेरी मेहनत का पूरा संसार है।
जिस दिन वो कागज़ मेरे हाथ आएगा,
उस दिन मेरा जन्मदिन सच में “जन्मदिन” कहलाएगा।