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मुक्तक

Prashant Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चिढ़ते हैं अपने ही कई लोग -
        
                                                    
                            
चाँद का जल , धत्
कमबख्त जानता ही नहीं,
उड़ान भरता है, गिरता है हर बार,
पराजित होता है, पराजय मानता ही नहीं ।
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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