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क्या क्या न किया जगा ने तेरे सुख की खातिर

Prashant Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे पैरों में फंदा डाला,तेरे सुख की खातिर,
        
                                                    
                            
तेरे उत्साह को मारा, तेरे सुख की खातिर,
कल के अंधेरे से आगाह किया,
एक तेरी चाह लेकर हज़ारों राह दिया,
तुझे मन का दीपक बेचैन किए जाता था,
उसको बुझाया ,तेरे सुख की खातिर।
तू तो आमादा था,दरिया में उतर जाने को,
ले के जवाँ धार,लहरों से टकराने को,
तू तो तुफान की खुशबू में जीवन तराशता था,
हमने तुझे समझाया,
लहरों से टकराने में क्या है,
पार हो जाने में क्या है,
तेरी धार ,तेरी गति को रोका,
तेरी तलाश,तेरी तराश को रोका,
उड़ान पर लगाम लगाया,
तुझे खतरों से बचाया,
तेरी आकाश को रोका,
तेरे सुख की खातिर।।
2 महीने पहले
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