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बचपन वाली होली

Prakriti

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            महीने भर पहले से ही होली की तैयारीयां
        
                                                    
                            
होती थी। शहरों में रंग-बिरंगी गुलाल पिचकारी
मास्क से सजी दुकानें।

बाहर से आने वाले मेहमानों का इंतजार होता
था होली एक साथ जो मनाएंगे।संयुक्त परिवार
में होली का अपना अलग ही मजा होता है।

तरह तरह के पकवानों से घर आंगन महकने
लगते हैं। तरह- तरह के नमकीन मिठाईयां मम्मी
दादी चाची ताई सब मिलकर बनाती थीं।

बच्चे पहले से ही खाने को तैयार हो जाया
करते थे।अलग अलग घरों से तरह तरह के व्यंजन साझा किए जाते थे।

बच्चे तरह तरह की पिचकारी मुलायम सुंगधित
गुलाल लाते थे होली से पहले ही सब एक-दूसरे
पर पानी वाले गुब्बारे फेंकते त्यौहार को उत्साह
से मनातें।

होलिका दहन का इंतजार रहता था उस रात
तो पूरी मस्ती करते उस रात तो नींद ही नहीं
आती थी बस होली की मस्ती सूझती थी।

और अगले दिन का तो बेसब्री से इंतजार रहता
था जल्दी सुबह हो कब अपने छोटे-छोटे दोस्तों
के चेहरों पर अपने फेवरेट रंग की गुलाल लगाएंगे
म्यूजिक डांस गाने बजाने के साथ धूमधाम से
होली मनाते थे।

पक्का रंग तो चेहरे से काफी दिनों तक नहीं
उतरता था। होली की शाम को अजीब सा सूनापन
भी लगता त्यौहार की विदाई का दिन जो होता है
फिर एक साल का इंतजार करना पड़ेगा इसलिए
मन थोड़ा उदास भी हो जाता था।

जब से बड़े हुए हैं हर साल होली भी आती है
दीपावली भी आती है बस मना लेते हैं खुश
हो जाते हैं।

मुझे लगता है खुश होने के लिए वो खास दिन
का इंतजार ही क्यों रना पड़ता है और बाकि दिन
हम अपनी जिंदगी में उलझे रहते हैं।

ये अजीब सी बात है ना खासकर उम्र के एक
पड़ाव में हम मस्ती करना भूल जाते हैं।
मन के अंदर उत्साह हमेशा जीवित रखिए
अपने अंदर के बच्चे को बड़ा मत होने
दीजिए। जिम्मेदारी परेशानी आती जाती रहेगीं।
छोटी-छोटी खुशियों को समेटिए और फिर
हर त्यौहार आज भी वैसा ही लगेगा।

फिर ये एक साल इंतजार करने वाला दिन का
इंतजार नहीं करना होगा खुशियां रौनक किसी
विशेष दिन की मोहताज नहीं होनी चाहिए।
हर दिन होली मनाओ।

जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश।
आप सभी को होली की शुभकामनाएं हर दिन को
उत्सव बनाओ।
5 महीने पहले
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