विज्ञापन

ज़िन्दगी गुलज़ार है

Pradeepti Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िन्दगी गुलज़ार है
        
                                                    
                            


यूँ तो हर पल एक बदलाव है,
कभी सहज तो कभी जबरन,
कभी ख़ुशनुमा तो कभी ग़मगीन (grieved),
मगर फ़ितरत इंसान की,
कुछ ऐसी होती है,
की पतझड़ में बहार की हसरत,
और बहार में पतझड़ का उर्स (yaad),
और पल यूँही बीत जाते हैं,
अधूरे से, बे इत्मेनानी (dissatisfaction) से,
और इंसान भागता रहता है,
ता उम्र ना जाने कौनसे पल की चाहत में,
ये भूलकर की,
एक अलग ही खूबसूरती बंजर में भी होती है,
कुछ बची ज़िन्दगी पतझड़ में भी होती है,
और पतझड़ है आज,
तो कल आनेवाली बहार है,
ये ज़िन्दगी के पहलू हैं,
बदलते रहते हैं,
बस ये जान लो,
हर पहलू में भी,
ये ज़िन्दगी गुलज़ार है  


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Bajrang Lal

19 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12655 कविताएं

View Profile