ज़िन्दगी गुलज़ार है
यूँ तो हर पल एक बदलाव है,
कभी सहज तो कभी जबरन,
कभी ख़ुशनुमा तो कभी ग़मगीन (grieved),
मगर फ़ितरत इंसान की,
कुछ ऐसी होती है,
की पतझड़ में बहार की हसरत,
और बहार में पतझड़ का उर्स (yaad),
और पल यूँही बीत जाते हैं,
अधूरे से, बे इत्मेनानी (dissatisfaction) से,
और इंसान भागता रहता है,
ता उम्र ना जाने कौनसे पल की चाहत में,
ये भूलकर की,
एक अलग ही खूबसूरती बंजर में भी होती है,
कुछ बची ज़िन्दगी पतझड़ में भी होती है,
और पतझड़ है आज,
तो कल आनेवाली बहार है,
ये ज़िन्दगी के पहलू हैं,
बदलते रहते हैं,
बस ये जान लो,
हर पहलू में भी,
ये ज़िन्दगी गुलज़ार है
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