किसी की याद मेरे आस पास रहती है
उदास होता हूं वो भी उदास रहती है
तुम्हारे यादों की दिल में धुवाँस रहती है
इसीलिए तो गले में ख़राश रहती है
किया है आप ने इस ज़ेहन ओ दिल पे जादू सा
जिधर भी जाऊं वहीं ग़म शनास रहती है
मय ए कुहन भी है साकी है संग दोस्त भी हैं
मगर लबों पे मेरे फिर भी प्यास रहती है
कोई समझता नहीं क्यों भटकती फिरती हवा
पिया मिलन को वो भी बदहवास रहती है
बदन को चीर के पहुंचा वो मेरी रूह तलक
दिल ओ दिमाग़ में वो ख़ास ख़ास रहती है
नज़र के सामने रहता है 'दीप' इक चेहरा
वो जिस्मियत में मेरे बे-असास रहती है
-प्रदीप तिवारी 'दीप'