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हृदय की जब बढ़े धड़कन समझ लेना मुहब्बत है

Pradeep Tiwari'Deep'

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                            हृदय की जब बढ़े धड़कन समझ लेना मुहब्बत है।
        
                                                    
                            
न काबू में रहे तन-मन समझ लेना मुहब्बत है।।१

दिखे जब राह में दिलवर ये नाचे मन मयूरा सा।
मगन हो दिल करे नर्तन समझ लेना मुहब्बत है।।२

सुबह या शाम हो हर पल रटन हो नाम की तेरे।
नज़र में बस वही साजन समझ लेना मुहब्बत है।।३

लगे ना भूख ना ही प्यास सुध बुध हो न काया की।
हृदय फिर भी रहे मधुबन समझ लेना मुहब्बत है।।४

दिलों में हो नहीं रन्जिश सभी लगते हो अपने से।
हो जिसका आचरण दर्पन समझ लेना मुहब्बत है।।५

चहकती हो महकती हो भरा पूरा हो पर यारों।
लगे सूना जो घर आंगन समझ लेना मुहब्बत है।।६

बिना घुॅंघरु बिना सरगम अगर हो पाॅंव में थिरकन।
ख़ुदी मीरा ख़ुदी मोहन समझ लेना मुहब्बत है।।७

नहीं दिन में शुकूं हो और रातों में हों नींदें गुम।
विरह की आग जलता तन समझ लेना मुहब्बत है।।८

हवा में 'दीप' खुशबू घुल गई है ऋतु बसन्ती है।
फिजा नाचे छनन छन छन समझ लेना मुहब्बत है।।९
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
 
3 महीने पहले
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