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मचा सकते हैं गदर

Pradeep Mukherjee

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                            मचा सकते हैं शब्द ग़दर
        
                                                    
                            
-डॉ. प्रदीप कुमार मुख़र्जी

शब्द केवल
नहीं होते शब्द ही
इनमें होती है
बड़ी महिमा
होता हैं इनमें
बड़ा मर्म और दम
तभी शास्त्रों में भी
शब्दों को कहा गया है
ब्रह्म
केवल अक्षर या मात्राओं का
मेल ही नहीं है शब्द
एक ध्वनि है शब्द
जो कहती है
अनकहे को
इसी से होते हैं हम
अव्यक्त से व्यक्त
सच तो यह है
कि शब्द खोलते हैं
गांठें
हमारे व्यक्तित्व की
हमारे भीतर के सच को
लाते हैं बाहर शब्द
इसलिए सार्थक होते हैं शब्द
जो भी बोलिए
बोलिए
खूब तोल कर ही
खूब सोच-विचार कर ही
निकालिए शब्द
अपने मुंह से बाहर
नहीं तो ढा सकते है
शब्द भी कहर
मचा सकते ये
ऐसा ग़दर
कि करते रह जाएंगे
आप अगर-मगर।

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4 वर्ष पहले
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