ज़िंदगी में
कुछ और पाने की
लालसा में
लगे हैं
अधिकतर लोग
इस 'कुछ और' में है
शामिल
भौतिक सुख
भोग-विलास
तथा इंद्रियों को
आनंद पहुंचाने वाले
उन्हें तृप्त करने वाले
सुख
मान-सम्मान, मूल्यों
कर्तव्यों की सूची
है नहीं कहीं शामिल
'कुछ और'की
फेहरिस्त में
है नहीं कुछ परवाह
बेशक हो जाए ज़िंदगी रिक्त
या अश्रुसिक्त।