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आज़ादी के सही लक्ष्यों की ओर

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद
        
                                                    
                            
हम बढे धीरे-धीरे
प्रगति के पथ पर
और अब हम
गिने जाते हैं
दुनिया की बढ़ी
आर्थिक-सामाजिक
ताकतों में
इतनी सारी भौतिक उपलब्धियों
के वाबजूद
कहां हैं आज हम ?
समृद्धि तो बढ़ी
पर साथ ही साथ बढ़ी
असुरक्षा भी हमारी
संपर्क बढ़ा
पर बढ़ा अकेलापन भी हमारा
आज सूचना का है
अंबार पास हमारे
पर घट रही है
समझ हमारी
क्योंकि दे दिया है हमने
सोचने का काम
मशीन को
जुटा तो लिए हमने साधन
पर रहे बिना साध्य
नहीं रहे हम
अब अपने स्वयं के लक्ष्य
बल्कि बना दिया गया है
हमें अब
किसी और के लक्ष्य का साधन
संभालना होगा हमें
अपने आपको
तभी कर सकेंगे प्राप्त
आज़ादी के लक्ष्यों को हम
समावेशी और सतत विकास
तथा चौमुखी प्रगति की ओर
हो सकेंगे अग्रसर हम।
2 महीने पहले
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