भोर हुआ , लावा दूध
चढ़ रहे शिव नागों पर
नागों के नाथ भोलेनाथ
आह्लादित हो रहे है
"नाग पंचमी "के त्यौहार में।
पड़ गये हैं झूले
पेड़ों की मोटी मोटी डालो पर
भीग भीग झूले झूल रहे
सब लईकी कजरी खेल रहीं है
सावन की रिमझिम खनक फुआरों में।
हो रहा है कुश्ती मैदानों में
सर्पों की तरह लिपट लिपट
लड़ रहे मल्ल अखाड़ों में
आनन्दित हो रहे हैं सब, त्यौहार में ।
तक्षक कन्या विवाह का राज़
कोई स्त्री पचा न पायी
जिसकी सजा आज भी
गुड़ियां पीट पीट कर पायी।
लंबी लंबी पुरवैया में
ऊंची ऊंची लहरों के साथ साथ
जगा कर रंग बिरंगी पाल
मांझी खेल रहे हैं
नैया नेवार।
शिक्षक प्रदीप माझी
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