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शोर मचाया आम्हीं गली-गली

Powari Bhasha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शोर मचाया आम्हीं गली -गली।
        
                                                    
                            
डिजिटल मंच अपनाया गली- गली।
अना आंधी को गति लक समाज मा,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चलीं।।

मातृभाषा को हित की बात फैली।
दिलों मा परिवर्तन की ज्योत जली।
अना आंधी को गति लक समाज मा,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चलीं।।

चेतना जगाया आम्हीं गली- गली।
आकांक्षा जगाया आम्हीं गली- गली।
अना आंधी को गति लक समाज मा ,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चली।।

वैभवशाली भाषा की आस लगी।
लक्ष्य सिद्वि की मन मा प्यास जगी।
अना आंधी को गति लक समाज मा,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चली।।

शिक्षित कन्याएं जागी गली- गली।
युवाशक्ति जागृत भयी गली- गली।
अना आंधी को गति लक समाज मा,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चली।।

कलाकारों की कला बहुआयामी बनी।
साहित्यिकों की लेखनी ला धार चढ़ी।
अना आंधी को गति लक समाज मा,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चली।।

कलाकारों न् शोर मचायीन गली- गली।
साहित्यिकों न् शोर मचायीन गली -गली।
अना आंधी को गति लक समाज मा,
भाषा को वैभव बढ़ावन की हवा चलीं।।

-ओ सी पटले
2 महीने पहले
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