मोरी लेखनी मा
निज समाज को प्रति समर्पण को भाव से।
मोरों दिल मा,
मातृभाषा ला वैभव प्राप्ति को विश्वास से।।
मोरी लेखनी ला
ईश्वरीय कृपा को आशीष वरदान से।
मातृभाषा को वैभव साती,
नवी- नवी संकल्पनाओं का भंडार से।।
मोरी लेखनी
अंधारो हटावन साती नवों आलोक से।
नवीं पीढ़ी को,
विचारविश्व समृद्ध करन को शब्द भंडार से।।
मोरी लेखनी मा
मातृभाषा को समस्याओं की जाण से।
नवयुग को अनुरुप,
भाषा वैभव बढ़ावन को सही समाधान से।।
मोरी लेखनी
मातृभाषा पोवारी को संरक्षण की ढाल से।
हितों को संरक्षण साती,
अवरोधों सीन लड़न की धारदार तलवार से।।
मोरी लेखनी
मातृभाषा पोवारी की राष्ट्रव्यापी पहचान से।
साहित्य को माध्यम लक,
मातृभाषा पोवारी मा नव-चैतन्य को संचार से।।
मोरी लेखनी
पोवारी भाषा को गुणवैभव को सौरभ से।
लेखनी को समर्पण लक,
मातृभाषा अना संस्कृति मा नवीं बहार से।।
मोरी लेखनी
पोवारी कलाकारों साती नवो आलोक से।
समर्पण भाव को कारण,
कलाकारों मा उमंग को दिव्य संचार से।।
मोरी लेखनी
मातृभाषा वैभव बढ़ावन नवीन आलोक से।
मातृभाषा पोवारी पर,
विमर्श अना व्याख्यान साती शब्द भंडार से।।
मोरी लेखनी मा
गौरवशाली पोवार समाज को स्वाभिमान से।
मातृभाषा पोवारी को,
समकालीन इतिहास को स्वर्णिम अध्याय है।।
-ओ सी पटले