विज्ञापन

मस्त होता पशुधन को सहवास का दिन

Powari Bhasha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
        
                                                    
                            
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया दिन गर्मी मा माजकर की ठंडी का।
बित गया दिन थंड़ी मा माजकर की गर्मी का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया दिन बोदा बैल की जोड़ी पालन को।
बित गया दिन पशुधन धन लक खेती करन का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया दिन लहान- लहान बांधी बंधवान का।
बित गया दिन धूरो पर झाड़ो की थंड़ी छांव का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया अच्छा दिन हात कुटाई को तांदूर का।
बित गया दिन ता़ंदूर की मांड पशुधन ला देन का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया वय दिन धूरो पर तोर ना पोपट का।
बित गया दिन बांधी मा लाखोरी ना मोट का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया दिन संयुक्त मोठो-मोठो परिवार का।
बित गया दिन पीड़ा चौकी ना भानी को ठाट का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

बित गया दिन गांवों मा मोठो गाय गोहन का।
गोधुलि बेला पर फाटक पर लुभान जारन का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

मस्त होता दिन आपली माटी अना लोगों मा रव्हन का।
मस्त होता दिन कष्ट मा जीवन को सुख खोजन का।
बड़ा मस्त होता वय दिन पशुधन को सहवास का।
मस्त होता वय दिन माटी को घरों मा निवास का।।

-ओ सी पटले
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all