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यादों की एक बस्ती में

Poonam Shinde

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यादों की एक बस्ती में दिल भी कोई अकेला था
        
                                                    
                            
चाहत थी न दोस्त था बस हालातों का मारा था

मंजर थे न रास्ते थे बस करवटें बदलता रहता था
सपनों की बंद दुनिया में आशिक वो भी आवारा था

मिलता था बिछड़ता था यादों से रोज झगड़ता था
नहीं नसीब में जो चीज़ें उनसे क्यूं मिलवाता था

ठोकर खाई जिससे पहले उसके लिए क्यूं सिसकता था
नई मंजर की तलाश में भी अफ़सोस पीछे रखता था
एक वर्ष पहले
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