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पिता, वटवृक्ष की छाया है

Poojal Vijayvargiya

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                            पिता, वटवृक्ष की छाया है,
        
                                                    
                            
हर गम, दुःख, परेशानी को,
जिसने दूर भगाया है,
सुख चैन की जड़ों को,
अपनेपन से जिसने फैलाया है,
पिता, वटवृक्ष की छाया है,
तरह तरह की मिट्टी से,
मिश्रण रूपी पोषक तत्वों को,
आभरण में जिसने मिलाया है,
सींचकर संस्कारों से,
जिसने इसे बढ़ाया है,
पिता, वटवृक्ष की छाया है,
सहनशीलता, ईमानदारी, धैर्य का,
जिसने खाद बीज उपजाया है,
अनेक उतार चढाव खुद सहकर,
जिसने ठहराव इसमें लाया है,
पिता, वटवृक्ष की छाया है,
घनी जटाएँ साहस रूपी,
जिसने आडम्बर बिछाया है,
कोमल पत्तियों रूपी निर्मल मन,
जिसने खुली किताब की तरह सजाया है,
पिता, वटवृक्ष की छाया है।
-पूजल दशरथ विजयवर्गीय
 
3 वर्ष पहले
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