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क्षणभंगुर मनुष्य

PAWAN THAKUR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्षणभंगुर यह मानव जीवन, संसार सदा चलता है,
        
                                                    
                            
हम रुक जाते बीच राह में, समय निरंतर बहता है।

ना साँसों का ठौर सुनिश्चित, ना भाग्य सदा मुस्काता,
समय-चक्र की एक करवट, हर वैभव हर ले जाता।

धन, यौवन, पद और प्रतिष्ठा, सब यहीं पड़े रह जाएँ,
कल जिनके चर्चे होते थे, वे भी धूल में मिल जाएँ।

संसार नहीं रुकता किसी बिन, यह क्रम यूँ ही चलता है,
हम नहीं रहेंगे तो कोई और यहाँ फिर पलता है।

इसलिए व्यर्थ अहं क्यों हो, कैसी मन की दूरी,
प्रेम, दया, विनम्रता ही मानव की सच्ची पूँजी।

पर इतना भी मत झुक जाना, कि खुद को खो बैठो तुम,
समर्पण के अंधे पथ पर अपना मान न तोड़ो तुम।

जग की रीति यही कहती है, जो खुद को मिटा देता,
लोग उसी की कीमत अक्सर धीरे-धीरे खो देता।

इसलिए प्रेम रहे मन में, पर स्वाभिमान भी जीवित हो,
विनम्रता के पावन जल में अपना अस्तित्व सुरक्षित हो।

 
एक महीने पहले
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