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ये धरती नहीं… चिनगारी है…!

PAWAN THAKUR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुबह की पहली किरण से…
        
                                                    
                            
शाम की अंतिम लाली तक…
मेहनत की हर धड़कन में…
धरती की हर हलचल तक…

जहाँ पसीना इतिहास लिखे,
जहाँ संघर्ष भी त्योहार लगे—
वो धरती हमारी है…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

छठिहारी की पावन माटी,
कटीहारी की हरियाली,
गंगा की निर्मल धारा है,
कोसी की भी रफ्तारी।

सौंधी-सौंधी खुशबू वाली
मिट्टी की फुलवारी हैं…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

छठिहारी की पहली किलकारी से,
कठिहारी की अंतिम यात्रा तक,
जन्म से लेकर अंतिम क्षण तक,
माटी से अपनी यारी है।

ये रिश्ता केवल शरीर का नहीं,
ये आत्मा की जिम्मेदारी है…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

विधि से लेकर विधान तलक,
बुद्धि से ऊँचे ज्ञान तलक,
नालंदा की ज्योति लेकर,
विक्रमशिला के मान तलक।

ज्ञान जहाँ सम्मान बने,
ऐसी अपनी तैयारी है…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

मज़दूरों के श्रम की ताकत,
हाकिम की जिम्मेदारी,
पसीने से किस्मत लिखते,
मेहनत सबसे प्यारी।

टूटे सपनों को जोड़ने वाली
हिम्मत की फुलझड़ी हैं…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

चंद्रगुप्त की वीर कहानी,
अशोक का धर्म महान,
बुद्ध-महावीर की धरती से
रोशन अपना हिंदुस्तान।

शांति, साहस और संस्कृति की
हम जीवित चिनगारी हैं…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

चंपारण की हुंकारों से
आज़ादी के जयघोषों तक,
देशभक्ति की हर धड़कन से
क्रांति के उद्घोषों तक।

भारत माँ पर मिट जाने की
हमने सौगंध उतारी है…!

हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

सौ-सौ पर भारी पड़ जाएँ,
ऐसी अपनी तैयारी है,
दुनिया चाहे जो भी बोले,
अपनी अलग खुद्दारी है।

सर ऊँचा करके बोलो सब—
ये धरती नहीं… चिनगारी है…!

हम बिहारी हैं!
हम बिहारी हैं!
हाँ… हम बिहारी हैं!!

 
एक महीने पहले
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