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मिलाने की कोई तदबीर है क्या

Parvez Muzaffar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसी को देख कर दिल-गीर है क्या
        
                                                    
                            
तिरे घर में मिरी तस्वीर है क्या

हमारे नाम पर चौंकी थी महफ़िल
नहीं तो आप की तक़रीर है क्या

सर-ए-तस्लीम ख़म करने से पहले
समझना चाहिए तक़्सीर है क्या

बकर ने ज़ैद से कुछ भी कहा हो
बकर के हाथ की तहरीर है क्या

रक़ीबों की बुराई हो रही है
मिलाने की कोई तदबीर है क्या

मिरी आँखों में तिनका देखते हो
तुम्हारी आँख में शहतीर है क्या

'मुज़फ़्फ़र' तंज़ कहने पर बुरा है
ग़ज़ल भी आप की जागीर है क्या
-मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
एक घंटा पहले
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