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उसकी रहमत की बारिश

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगर सर पर न छत होती मेरे प्रभू की रहमत की
        
                                                    
                            
ख़ताएँ बख़्शता फिर कौन मेरी रूठी क़िस्मत की

गुनाहों का मिरे रखता नहीं है लेखा-जोखा वो
ज़रूरत ही नहीं हमको किसी की भी इनायत की

बलाएँ सारी मुझ तक आने देता ही नहीं है वो
चुकाऊँगी भी कैसे मेहरबानी मैं हिमायत की

उसी रहमत की बारिश में यूँ ही भीगूँ हमेशा मैं
है ख़्वाहिश दिल को मेरे सिर्फ उसकी ही सख़ावत की

दुआओं की सदा छत मेरे सर पर भी रहे क़ायम
है 'पारुल' को ज़रूरत अपने सर पर उसकी नेमत की
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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