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रिश्तों के माया जाल

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिश्तों के मायाजाल में बसती है ज़िंदगी
        
                                                    
                            
वैसे बहुत ही प्यारी सी लगती है ज़िंदगी

इसमें सुकून है तो, बहुत दर्द भी तो हैं
दिन-रात आग में ही सुलगती है ज़िंदगी

सुख-दुख तो ज़िंदगी का हैं हिस्सा, है सच यही
बनकर सवाब सी ही बरसती है ज़िंदगी

अपनी पसंद के सभी रिश्ते मिले किसे
रिश्तों में सबको ही सदा ठगती है ज़िंदगी

अपना लो दिल से रिश्तों को बख़्शे खुदा ने जो
बख़्शीश से ही उसकी महकती है ज़िंदगी
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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