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मुझको तू रिहाई दे

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ ख़ुदा अब गम से मुझको तू रिहाई दे
        
                                                    
                            
बोझ सी इस ज़िंदगी से अब विदाई दे

जब मोहब्बत की तू ने राहे  जुदा कर दीं
रुसवा कर मुझको नहीं अब तो बुराई दे

दूर इक दूजे से हमको होना था शायद
फ़ायदा क्या कोई क्यूँ तुमको दुहाई दे

सजदे दर पे तो किये मैंने हजारों ही
दर्द मेरा क्यूँ न तुझको भी दिखाई दे

फैला है दामन मेरा तेरे ही आगे अब
मर्ज़ी तेरी तू जो चाहे वो ख़ुदाई दे

रूह से जैसे अलग ये जिस्म होता है
तू मोहब्बत में न ऐसी भी जुदाई दे

प्यार में कुर्बानियाँ कब तक मैं यूँ दूँगी
अब नहीं इस ज़िंदगी में कुछ सुझाई दे
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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