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मिल के बात करें

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गिला है कोई तो, आओ के, मिल के बात करें
        
                                                    
                            
छुपे हैं शिकवे, जो उन पे, मुज़ाकरात करें

ये बोझ दिल में ले, कब तक, यूँ जीते हम रहेंगे
तो क्यूँ न, बात करें और ग़म नजात करें

खताएँ इंसाँ से ही होती हैं, ख़ुदा से नहीं
नहीं कभी गिलों का, हम तक़ल्लुफ़ात करें

ये ज़िंदगी, यूँ तो, यादों में ही गुज़ारनी है
बुरा भी क्या है, जो मिलने की ख़्वाहिशात करें

मिले हमें भी तो, इक हम-सफ़र जो साथ रहे
भरोसा उस पे तो हम भी दम-ए-हयात करें
2 महीने पहले
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