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मन हल्का हो जाता है

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खताएँ माफ़ करने से ये मन हल्का हो जाता है
        
                                                    
                            
समय के साथ ग़म सबका सदा धुँधला हो जाता है

जहां में होती है सबसे ख़ताएँ इंसाँ हैं हम सब
किया है माफ दिल से गर तो समझौता हो जाता है

गमों का बोझ दिल पर रखना रंजिश को बढ़ाता है
बनी रहती है रंजिश चाहे इक अर्सा हो जाता है

कभी सोचो के रिश्ते से बड़ी होती है क्या ग़ल्ती
तो क्यूँ बरसों का रिश्ता पल में ही स्वाहा हो जाता है

गले अपने लगाकर देखो रूठों को कभी 'पारुल'
गिलो से आइना था मैला चमकीला हो जाता है
3 महीने पहले
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