मालूम हमको बेवफ़ा तुम हो नहीं सकते कभी
तुमको मोहब्बत हमसे है क्यूँ तुम नहीं कहते कभी
आँखें तेरी दहलीज़ पर ही मुंतज़िर रहती सदा
दिल से मेरी तुम राह लेकिन क्यूँ नहीं तकते कभी
माँगा कभी तुमने दुआ में साथ जीवन भर का था
तुमने कहा था अपनी बातों से नहीं फिरते कभी
ऐसे बदल जाओगे, हमने ख़्वाब में सोचा न था
तुम कुछ क़दम तो साथ मेरे भी सनम चलते कभी
आसाँ नहीं होता बसा कर दिल में 'पारुल' भूलना
दिल से तुम्हें यूँ चाहने वाले नहीं मिलते कभी