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इश्क़ की नेमत

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नेमत मिली है इश्क़ की परवरदिगार से
        
                                                    
                            
पछतावा हो न तुमको कभी अपने प्यार से

करना है ज़िंदगी का हमें साथ ही सफ़र
रहना हमें सँभल के ही नफ़रत के वार से

होता नहीं है इश्क का संबंध भी उम्र से
मुश्किल है बचना ज़िंदगी में इस ख़ुमार से

टूटे नही ये डोर मोहब्बत की यूँ कभी
तुम जोड़े रखना इसको सदा एतिबार से

क़ायम है इश्क़ दूरियों में भी हमेशा से
होता ये गहरा और सदा इंतिज़ार से

मिलता क़रार भीग के ही प्यार में सदा
भीगें हैं रूह-ओ-जिस्म सदा तेरे प्यार से

दुनिया में चीज़ हर नहीं होती बिकाऊ है
महरूम ज़िंदगी में हैं हम आज यार से
2 महीने पहले
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