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गुलाब इश्क़ का

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुलाब इश्क़ का कबूल कर लो तुम मेरे सनम
        
                                                    
                            
ये दिल में इश्क़ मौन सा ही भर लो तुम मेरे सनम

न मुख से तो कभी भी कह सकेंगे हाल अपना हम
समझ सको तो दिल में कर ही घर लो तुम मेरे सनम

जहां ने सारे मुझको दुख ही तो दिया है आज तक
कभी तो प्यार से ये ग़म भी हर लो तुम मेरे सनम

ख़याल तेरा मुझको यारा रात दिन ही रहता है
महक सा बन के मुझमें यूँ बिखर लो तुम मेरे सनम

मेरे तो रोम-रोम में बसे हो ख़ुशबू बन के तुम
यूँ रूह में मेरी सदा उतर लो तुम मेरे सनम
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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