मेरे ग़म में भी आँसू उनके आएँ दोस्त हैं वो
बुझे उम्मीद के दीपक जलाएँ दोस्त हैं वो
बिना मतलब का याराना हो फितरत जिनकी यारों
हमेशा साथ सुख-दुख में निभाएँ दोस्त हैं वो
हो जाए जाने-अनजाने किसी से भूल कोई
सदा इल्ज़ाम अपने सर उठाएँ दोस्त हैं वो
मेरे दिल की इबारत पढ़ लें चुपके से हमेशा
मेरा ही हाल मुझको जो बताएँ दोस्त हैं वो
झगड़ लेते हैं छोटी छोटी बातों पर भी मुससे
मगर पल में ही बातों को भुलाएँ दोस्त हैं वो
सिखाया दोस्ती ने ही मुहब्बत करना हमको
अदाएँ जिनकी दिल सबका लुभाएँ दोस्त हैं वो
ज़माने से वो लड़ जाएँ सदा 'पारुल' की ख़ातिर
जो फेवीकोल का बन जोड़ जाएँ दोस्त हैं वो