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बोझ यादों का

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ल्वत-ओ-जल्वत में कोई फ़र्क़ ही दिखता नहीं
        
                                                    
                            
बोझ उसकी यादों का दिल से कभी उतरा नहीं

मेरी किस्मत में नहीं था साथ उसका उम्र भर
फिर भी पहलू में किसी भी गैर को रक्खा नहीं

कुछ कमी रह ही गई थी प्यार में हमसे यहाँ
आह को भी अब हमारी वो कभी सुनता नहीं

वैसे ज़ाहिर करते ख़ुद को मुतमइन हम भी बहुत
ज़ख़्म जैसे दिल का मेरे उतना भी गहरा नहीं

लाख कोशिश भी गिराने की ज़माना कर ले अब
हौसलों पर फ़र्क़ 'पारुल' के भी अब पड़ता नहीं
2 महीने पहले
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