विज्ञापन

आशियाना तो तेरा है

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शौक से तोड़ो मिरा दिल आशियाना तो तेरा है
        
                                                    
                            
घर बसाया था कभी हमने ठिकाना तो तेरा है

वक़्त भी ऐसे बदल जाएगा हमको क्या पता था
फिर भी दिल मेरा सदा से ही दिवाना तो तेरा है

धीरे-धीरे ज़िंदगी सारी बिखरती ही गई थी
हम अकेले रह गए सारा ज़माना तो तेरा है

जी नहीं पाएँगे तुम बिन हम ख़बर है तुमको भी ये
फिर भी आदत में सदा हमको रुलाना तो तेरा है

ज़िंदगी का ये सफ़र 'पारुल' कटेगा कैसे तन्हा
ज़िंदगी से नाम मजबूरी मिटाना तो तेरा है
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile