विज्ञापन

अधूरा प्रेम

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या अधूरा प्रेम तुमको मुक्ति दे पाएगा
        
                                                    
                            
रूह में मेरी तेरा कुछ हिस्सा रह जाएगा

वो मुलाकातों के वादे क्या भुला दोगे
ग़म उन्हीं वादों का मर के भी सताएगा

मिट्टी का तन मिट्टी में मिल जाना है इक दिन
मिट्टी बनकर भी न गंगा में समाएगा

तुम शिकायत रखना मत मुझसे दम-ए-रुख़सत
सिलसिला ये साथ तेरे उस जहां जाएगा

जन्मों से मिलते बिछड़ते आए हैं हम तुम
अब मिलन होगा ही अपना गर तू चाहेगा

साथ अवचेतन में यादें जाती है हर जन्म
सामना फिर जन्म अगले अपना हो जाएगा

जानते हो तुम भी सब कुछ पर न मानोगे
खफ़गी में ये प्यार अपना तू लुटाएगा

वक़्त रहते सारे शिकवे दूर कर लें हम
दर्द ये फ़ुर्क़त का दोनों को मिटाएगा

मान लेंगे के ख़ता सारी हमारी थी
माफ़ कर मुझको तू ऊँचा उठ ही जाएगा
3 hours ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all