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क्या अब भी मिल पाई है आज़ादी हमें?

Pari Nagar

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                            आजादी
        
                                                    
                            

क्या है ये आज़ादी?
क्या अब भी मिल पाई है आज़ादी हमें?

हम अंग्रेज़ों से तो आज़ाद हो गए,
पर क्या हम खुद से आज़ाद हो पाए?

क्या हम अपने मन से आज़ाद हो पाए?
क्या हम अपनी सोच से आज़ाद हो पाए?
क्या हम उन डर और बंदिशों से आज़ाद हो पाए,
जो आज भी हमारे कदमों को रोकते हैं?

तिरंगा तो आज़ादी से लहराता है,
पर क्या हर इंसान भी आज़ादी से जी पाता है?

सवाल सिर्फ़ देश की आज़ादी का नहीं,
सवाल है—क्या हम अपनी सोच को आज़ाद कर पाए?

क्योंकि सच्ची आज़ादी वही,
जहाँ इंसान अपने मन की सुन सके,
सही के लिए आवाज़ उठा सके,
और बिना किसी डर के
अपने सपनों की ओर उड़ सके।

-परी नागर
2 महीने पहले
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