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तभी तो सृष्टि मुस्कुराती है

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूरज ने चांद से पूछा
        
                                                    
                            
ऐसी क्या गुस्ताखी हो गई ?
जो मेरे उदय होने पर
तुम छुप जाते हो
और डूबने पर चले आते हो
चांद मुस्कुराया और बोला
यह आंख मिचौली सदियों से चली आ रही है
मुझे मिटाने तुम चले आते हो
और मैं खुशी खुशी दूर चला जाता हूं
यही तो है हमारा रिश्ता
एक का होना और दूसरे का चले जाना
तभी तो ये सृष्टि मुस्कुराती है
 -सरिता सिंह
13 घंटे पहले
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