विज्ञापन

क्या वाकई सबकुछ उसका होता है

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब कुछ तेरा ही तो है सुनकर
        
                                                    
                            
स्त्री अपना सर्वस्व त्याग देती गृहस्थी के लिए
पर हर छोटी-बड़ी बातों के लिए इजाजत लेनी पड़ती है
तब मन में एक सवाल उठता है......
क्या वाकई सब कुछ उसका होता है?
या ये उसका एक खुबसूरत भ्रम है
 -सरिता सिंह
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

श्री सनातन

671 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile

Neet Biology

43 कविताएं

View Profile