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जो तुम आ जाते एक बार

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो तुम आ जाते एक बार
        
                                                    
                            
बेचैन दिल को करार आ जाता ।
दीदार को तरस गई हमारी अंखियां
कान तरस गए सुनने को तुम्हारी बतिया ।
अब तो मौसम भी करवट ले चुका
फूलों की पंखुड़ियां झर चुकी
शाखों से पाती बिछुड़न लगी
कब से राह देख रही तुम्हारी सजना
अब तो थक गई राह तकते नयना
मन में हो रही है एक कड़वी कसक
कहीं हमारे मिलन का उजड़ न जाए वसंत ।
विरह की अग्नि में जल रही
मनमीत तुम्हारी ये प्रेयसी .…
अब आ भी जाओ
और न तड़पाओ प्रीतम
स्वरचित -सरिता सिंह
2 महीने पहले
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