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भीतर का शोर

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन के भीतर का शोर
        
                                                    
                            
बेहद परेशान कर रहा है
विचारों की लहरें उफान भर रही है
बाहर एक नफरत की दीवार खड़ी कर
बार बार आकर टकरा रही है
ये शोर नकारात्मक विचारों से हावी हो
पूरी सकारात्मक उर्जा को नष्ट कर रहा है
जब भी ये बाहर आएगा
एक ज़लज़ला लेकर आएगा
और सब कुछ उथल-पुथल कर देगा
बाहर आने से पहले ही नकेल डालनी होगी
मन के द्वंद को शांत करना होगा
मनन कर अंतर्मन को जगाना होगा
वरना सब कुछ बेकाबू हो जाएगा

स्वरचित -सरिता सिंह
7 घंटे पहले
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