मन के भीतर का शोर
बेहद परेशान कर रहा है
विचारों की लहरें उफान भर रही है
बाहर एक नफरत की दीवार खड़ी कर
बार बार आकर टकरा रही है
ये शोर नकारात्मक विचारों से हावी हो
पूरी सकारात्मक उर्जा को नष्ट कर रहा है
जब भी ये बाहर आएगा
एक ज़लज़ला लेकर आएगा
और सब कुछ उथल-पुथल कर देगा
बाहर आने से पहले ही नकेल डालनी होगी
मन के द्वंद को शांत करना होगा
मनन कर अंतर्मन को जगाना होगा
वरना सब कुछ बेकाबू हो जाएगा
स्वरचित -सरिता सिंह
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