जब क्रोध की ज्वाला मन में उठे
तब मूक रहना ही बेहतर है
क्योंकि उस क्षण मुंह से निकले अपशब्द
और कोई भी लिए गए फैसले
अक्सर उलझन की वजह बनते हैं
-सरिता सिंह