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"धैर्य और संतोष"

Pankaj Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राहें अगर हों धुंधली,
        
                                                    
                            
मन में जगाओ धैर्य तुम।
जीवन सरल हो जाएगा,
रखो हृदय में शौर्य तुम।

चलता रहेगा वक्त यह,
बदलेगा हर इक दौर भी।
सुलझेगी अविरल जिंदगी,
आएगी सुंदर भोर भी।

बेचैनियों के जाल में,
घिरता यहाँ इंसान है।
व्याकुल बटोही राह का,
खोता स्वयं की शान है।

मन का भटकना छोड़ कर,
कर लो समय का सामना।
धीरज थमेगा हाथ जब,
पूरी होगी कामना।

संतोष का जब साज हो,
बजती मधुर झंकार है।
तृष्णा सभी मिट जाती है,
होता सुखी संसार है।

छोटा सफर इस श्वास का,
सार्थक इसे तुम रूप दो।
संतोषमयी संगीत से,
जीवन को पावन धूप दो।
एक महीने पहले
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