याद है वो मखमली घास का बिछौना,
रूठना मनाना और झट से गोद में सोना,
बातों का सिलसिला खत्म न होना,
जहां भी जाएं, प्यारा लगता था हर कोना।
-चंद्र दत्त शर्मा