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वक्त किसी को नहीं छोड़ता

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त किसी को नहीं छोड़ता,
        
                                                    
                            
वक्त आने पर...,
वक्त ही सबका हिसाब कर देता है।
राजा महाराजे सेठ जमीदार,
अपनी अपनी तूती बजाकर चले गए,
छोड़ गए वो खंडहर...,
जहां सबका हिसाब होता था।
रानियों के रनिवास,
दासियां बेहिसाब,
उन सबकी चहल पहल शोर गुल,
आज वो इंसानों के लिए तरस रही हैं।
आज वो हवेलियों...,
कीड़े मकोड़े पक्षी और चमकादड़ की,
पनाह गाह बनी हुई है।
वक्त भी क्या है साहब?
वक्त की मार सब पर पड़ी है,
वक्त के आगे सब नतमस्तक हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
3 महीने पहले
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