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तेरे जीवन में आकर

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे जीवन में आकर हम कसूरवार हो गए,
        
                                                    
                            
समझा था कुछ और, हम कुछ और हो गए।
इसी भ्रम में जीते जीते काफी उम्र निगल गए,
अब शेष क्या बचा? होश फाख्ता हो गए।
-चंद्र दत्त शर्मा
2 महीने पहले
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