नजर का क्या है?
अच्छा भी देख लेती है,
और बुरा भी देख लेती है।
कहीं अच्छा देख खुश हो जाती हैं,
और कुछ दृश्य घृणा भर देती हैं।
नजरों में चढ़े तो अपने,
नहीं चढे तो...,
पल भर में पराए कर देती हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा