माता पिता के जीते जी,
तीरथ करने जाएं कहां?
सब कुछ इनमें ही बसा है,
वजूद नहीं कोई इनके बिना,
सारे जहां की शक्ति इनमें,
ढूंढते फिरो जाने कहां कहां?
-चंद्र दत्त शर्मा