जो अपने मां बाप की,
धन दौलत को...,
लुटाएगा एक ना एक दिन।
यह समझ लो...,
बुरा अंत होगा एक ना एक दिन।
चढ़ा है जो नशा पैसे का,
वो जरूर उतरेगा एक ना एक दिन।
जो समझे ना...,
अपने से ज्यादा किसी को,
उसका नशा उतरेगा एक ना एक दिन।
जो चढ़ेगा वो गिरेगा जरूर,
समझ जाओ एक ना एक दिन।
-चंद्र दत्त शर्मा