एक दूसरे का दीदार करते रहेंगे,
दूर से ही सही, कब तक सहेंगे?
कुछ नहीं रहता रह जाती हैं यादें,
पानी साथ बबूले कब तक बहेंगे?
-चंद्र दत्त शर्मा