कौन समझता है एक दूसरे के दर्द को?
सबने अपने ही दु:ख दर्द को पहचाना है।
दु:ख दर्द तो सबको एक जैसा ही होता है,
कोई सह लेता है कोई जाहिर कर देता है।
-चंद्र दत्त शर्मा