चाहत ऐसी हो जो पूरी हो सके,
वरना तो चाहतें...,
चाँद तारे तोड़ने की भी होती हैं,
लोग ऐसा मोहब्बत में करते हैं।
वादे लगभग सारे झूंठे होते हैं,
ऐसा कर करके फिर बाद में भरते हैं।
फिर कदम फूंक फूंककर रखते हैं,
होने वाली किसी अनहोनी से डरते हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा