भलाई करके भी लोग,
पराए क्यों हो जाते हैं ?
जिंदगी बख्शी जिनको,
खफा क्यों हो जाते हैं ?
रिश्तों की क्या कीमत?
हम समझ नहीं पाते हैं।
क्या खोया क्या पाया ?
बाद में ध्यान आते हैं।
- चंद्र दत्त शर्मा